रोड़ वर्ण व्यवस्था में क्षत्रिय हैं। यह पहचान पीपल ऑफ इंडिया: हरियाणा और NCBC रिकॉर्ड में दर्ज है।
स्रोत ↗इतिहास
रोड़ इतिहास: अमीन की चौरासी से आधुनिक हरियाणा तक
पुराने नगरों, किलों, गांवों, खेती, समाज सुधार, संस्थाओं और आज की उपलब्धियों से बनी रोड़ समाज की कहानी।
रोड़ समाज और पहचान
रोड़ कौन हैं?
रोड़ हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और पानीपत क्षेत्र में केंद्रित क्षत्रिय समाज है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी रोड़ गांव और परिवार हैं। इस अभिलेख में 119 गोत्र प्रविष्टियां, 316 गांव और स्थान नाम, और 444 गोत्र से गांव संबंध हैं।
हरियाणा में रोड़ सामान्य श्रेणी में आते हैं।
हरियाणा रिकॉर्ड ↗
मुख्य भूगोल
अमीन, थानेसर और रोड़ क्षेत्र
उन्नीसवीं सदी के विवरण अमीन को रोड़ चौरासी का मुख्य गांव बताते हैं। बसावट थानेसर के दक्षिण, पुराने करनाल जिले, अंबाला और जींद के हिस्सों, कैथल के दक्षिण और गंगा पार के बारह गांवों तक दर्ज थी।
आज करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और पानीपत का यह पट्टा लिखित इतिहास और जीवित सामुदायिक भूगोल दोनों का केंद्र है।
गांवों का नक्शा देखें ↗समयरेखा
कथा, अभिलेख और जीवित विरासत
दिव्यावदान रोरुक को राजा रुद्रायण की महान नगरी बताता है। यह कथा बाद में बोरोबुदुर के पत्थर शिल्प में दिखाई दी।
दिव्यावदान ↗भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कागरोल की परंपरा दर्ज की कि खंगार के पुत्र राजा रोड़ ने वहां का पुराना किला बनवाया था।
सर्वेक्षण रिपोर्ट ↗पंजाब जनगणना ने अमीन और थानेसर के आसपास रोड़ समाज का मुख्य क्षेत्र दर्ज किया। सागवाल, माइपला, खीची और जोगरान बड़े गोत्रों में गिने गए।
पंजाब कास्ट्स ↗करनाल गजेटियर ने 1881 में पंजाब के 40,731 रोड़ दर्ज किए। इनमें 34,094 करनाल और 4,861 अंबाला में थे।
करनाल गजेटियर ↗जगद्गुरु स्वामी ब्रह्मानंद जी का जन्म वर्तमान कैथल जिले के चुहड़ माजरा में हुआ।
राज्य स्मरण ↗बाद के करनाल गजेटियर ने 23 प्रमुख गोत्र दर्ज किए और कई गोत्रों को गांवों और क्षेत्रों से जोड़ा।
गजेटियर रिकॉर्ड ↗एक सुरक्षित पर्चे में गुरु आश्रम मुंदड़ी के वार्षिक मेला स्नान और शांति महायज्ञ की घोषणा मिलती है।
1963 का पर्चा ↗पीपल ऑफ इंडिया: हरियाणा ने रोड़ भाषा, खेती, परिवार, आस्था, पंचायत और सामाजिक संस्थाएं दर्ज कीं।
पीपल ऑफ इंडिया ↗एक जीनोम अध्ययन के मुख्य मॉडल में एक से अधिक प्रतिभागी वाले समूहों के बीच रोड़ नमूना स्टेपी संबंधित वंश तुलना में सबसे ऊपर रहा।
जेनेटिक्स रिपोर्ट ↗हरियाणा ने चुहड़ माजरा में राज्य स्तरीय गुरु ब्रह्मानंद जयंती आयोजित की। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष इसमें उपस्थित रहे।
2025 कार्यक्रम ↗
प्राचीन साहित्यिक मानचित्र
रोरुक और राजा रुद्रायण
बौद्ध ग्रंथ दिव्यावदान रोरुक को सौवीर की महान नगरी और रुद्रायण को उसका राजा बताता है। कथा में रोरुक और मगध की राजधानी राजगृह के बीच व्यापारी, संदेश और राजकीय उपहार चलते हैं।
इतिहासकार बी सी लॉ ने रोरुक को सिंध के अलोर से जोड़ने का प्रस्ताव रखा। यह प्राचीन नगर का साहित्यिक और भौगोलिक इतिहास है।
राजा रोड़
कागरोल के पुराने किले का 1874 अभिलेख
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने स्थानीय गवाही दर्ज की कि खंगार के पुत्र राजा रोड़ ने कागरोल का पुराना किला बनवाया था। सर्वेक्षक ने किले के टीले, एक योद्धा शिल्प और वहां से मिले घिसे हुए धातु खंड का भी वर्णन किया।
1874 की रिपोर्ट खोलें ↗


सिंध की पांचवीं या छठी शताब्दी की मुद्रा
सिंध का संदर्भ
राय सत्ता और अलोर का क्षेत्रीय संसार
आधुनिक इतिहास लेखन सिंध की राय सत्ता को पांचवीं से सातवीं सदी में रखता है। अलोर इस क्षेत्र की प्राचीन राजधानी परंपराओं से जुड़ा है। दिखाई गई मुद्रा उसी समय के सिंध का क्षेत्रीय संदर्भ है। इसे राजा रोड़ के नाम से जारी मुद्रा नहीं माना गया है।
राय वंश का अध्ययन ↗
जगद्गुरु स्वामी ब्रह्मानंद
शिक्षा, सुधार और सेवा का स्थायी नाम
24 दिसंबर 1908 को चुहड़ माजरा के रोड़ परिवार में जन्मे स्वामी ब्रह्मानंद जी ने शिक्षा, महिला शिक्षा, सामाजिक सुधार, एकेश्वरवाद और गौ सेवा पर काम किया। उनकी यात्रा आर्य समाज और ग्रामीण हरियाणा के सार्वजनिक जीवन से जुड़ी रही।
ब्रह्मानंद पचासा, नीति विचार, ब्रह्म विचार, शरीर उपनिषद और गोरक्षा उनके नाम से दर्ज रचनाओं में शामिल हैं। विद्यालय, महाविद्यालय, आश्रम और सार्वजनिक आयोजन आज भी उनके नाम और विचार को आगे ले जाते हैं।
जीवित परंपरा
मेला, महायज्ञ, शिक्षा और जनसेवा
यह विरासत केवल स्मारक नहीं है। यह वार्षिक जुटान, शिक्षण संस्थाओं, आश्रमों और समाज सेवा में दिखाई देती है।


शिक्षा
लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए शिक्षा को समाज सुधार का आधार माना।
समानता
भेदभाव और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सार्वजनिक संदेश दिया।
एकेश्वरवाद
आर्य समाज की सुधार परंपरा से जुड़े एक ईश्वर और नैतिक जीवन पर जोर दिया।
सेवा
गौ सेवा, आश्रम, भंडारा और लोक कल्याण को जीवन के काम से जोड़ा।
शिक्षा में विरासत
उनका नाम आगे ले जाने वाले संस्थान
गुरु ब्रह्मानंद जी राजकीय पॉलिटेक्निक
1947 में स्थापित राजकीय तकनीकी संस्थान
अंजनथलीगुरु ब्रह्मानंद कन्या महाविद्यालय
हरियाणा उच्च शिक्षा सूची में महिला महाविद्यालय
कुरानागुरु ब्रह्मानंद महिला महाविद्यालय
2014 में स्थापित पानीपत जिले का महाविद्यालय
मंचुरीगुरु ब्रह्मानंद कॉलेज ऑफ एजुकेशन
एनसीटीई रिकॉर्ड में बीएड संस्थान
उंटलागुरु ब्रह्मानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल
2003 में स्थापित सीबीएसई विद्यालय
पूंडरीस्वामी ब्रह्मानंद गुरुकुल
हरियाणा विद्यालय प्रबंधन रिकॉर्ड में दर्ज

हरियाणा से आगे
एक मुख्य क्षेत्र, कई जीवित संबंध
ऐतिहासिक और वर्तमान रिकॉर्ड रोड़ समाज को हरियाणा की सीमा से आगे भी रखते हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश
1999 के राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग रिकॉर्ड में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बिजनौर का उल्लेख है। उत्तर प्रदेश की वर्तमान राज्य सूची में रोड़ नाम 60वें क्रम पर है।
NCBC ↗रुड़की और हरिद्वार
रुड़की की नगर पालिका स्थानीय नाम परंपरा में रोड़ की बसावट का उल्लेख करती है। हरिद्वार में रोड़ धर्मशाला जीवित सामुदायिक संस्था है।
रुड़की का इतिहास ↗गंगा पार के गांव
1883 के पंजाब रिकॉर्ड ने रोड़ मुख्य क्षेत्र के साथ गंगा पार बारह गांव भी दर्ज किए। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश से संबंध का सबसे पुराना जनसंख्या रिकॉर्ड है।
1883 रिकॉर्ड ↗समुदाय की व्यापक स्मृति
सामुदायिक संगठन बैसवाड़ा, बुंदेलखंड, बिहार, हिमाचल और ऑस्ट्रेलिया तक संबंध दर्ज करते हैं। यह आगे के गांव और परिवार शोध के लिए एक उपयोगी मानचित्र है।
सामुदायिक विवरण ↗जनसंख्या आनुवंशिकी
उत्तर पश्चिम भारत में सबसे मजबूत स्टेपी संबंधित परिणाम
2018 के अध्ययन के मुख्य तीन स्रोत वाले मॉडल में रोड़ नमूने में 62.1 प्रतिशत स्टेपी एमएलबीए संबंधित वंश अनुमानित किया गया। मानक त्रुटि 2.4 प्रतिशत अंक थी। एक से अधिक नमूने वाले सभी तुलना समूहों में यह सबसे बड़ा परिणाम था।
मुख्य ऑटोसोमल विश्लेषण में 14 रोड़ नमूने थे। अलग मान्य मॉडल 43.6 से 62.1 प्रतिशत तक रहे।
पूरा डेटा रिपोर्ट देखें ↗
काम और समाज
धरती से लेकर सार्वजनिक जीवन तक
खेती लिखित रिकॉर्ड का सबसे लगातार आधार है। पुराने स्रोत रोड़ भूमिधरों और किसानों का वर्णन करते हैं। बाद के अध्ययन में स्वयं खेती, दुग्ध पशु, पशुपालन और खेतों में महिलाओं का काम दर्ज है।
आज खेल, शिक्षा, जनसेवा, सेना, व्यापार और पेशेवर काम समाज की पहचान को देश और दुनिया तक ले जा रहे हैं।
सामाजिक जीवन
भाषा, परिवार, आस्था और संगठन
भाषा
हरियाणवी और हिंदी, देवनागरी लेखन के साथ।
परिवार
गोत्र बहिर्विवाह, संयुक्त परिवार की परंपरा और समय के साथ बढ़ते एकल परिवार।
आस्था
हिंदू और सिख उपस्थिति, होली, दिवाली, गांव की देव परंपराएं और आर्य समाज का प्रभाव।
संगठन
सामाजिक पंचायत, महासभा, धर्मशाला, आश्रम और शिक्षा संस्थानों की मजबूत परंपरा।
सामाजिक संस्थाएं
बैठक, सुधार और सेवा के अपने केंद्र
पुराने विवरण मजबूत सामाजिक पंचायतों और सामूहिक बैठकों का उल्लेख करते हैं। आज कुरुक्षेत्र, करनाल, असंध, हरिद्वार और दूसरे स्थानों की धर्मशालाएं, आश्रम और सभाएं इसी संगठन शक्ति को आगे बढ़ाती हैं।
धर्मशालाएं और संस्थाएं देखें ↗सार्वजनिक रिकॉर्ड
श्रेणी और प्रतिनिधित्व
हरियाणा में रोड़ सामान्य श्रेणी में आते हैं। उत्तर प्रदेश की राज्य श्रेणी अलग है। 1999 के NCBC रिकॉर्ड में रोड़ संस्थाओं का औपचारिक प्रतिनिधित्व भी दर्ज है।
समाज की स्मृति
कई कथाएं, एक समाज
परिवारों, क्षेत्रों और समय के साथ अलग उत्पत्ति कथाएं बची हैं। हर कथा समाज की अपनी ऐतिहासिक स्मृति का हिस्सा है।
बादली और झज्जर
पुराने अभिलेखों में प्रवास की एक स्मृति मिलती है जो परिवारों को बादली के आसपास की पुरानी बसावट से जोड़ती है।
संभल और चौहान
उन्नीसवीं सदी की एक वंश परंपरा अमीन के आसपास दर्ज कथाओं में सबसे स्पष्ट रूप से मिलती है।
राजपूताना और राजपूत वंश
समाज की कई परंपराएं रोड़ वंश को राजपूताना और राजपूत वंशों से जोड़ती हैं।
पानीपत और मराठा संबंध
एक व्यापक आधुनिक परंपरा कुछ परिवारों को 1761 की लड़ाई के बाद यहीं रहे मराठा सैनिकों से जोड़ती है।
राजा रोड़ और कागरोल
1874 का पुरातत्व सर्वेक्षण कागरोल में राजा रोड़ और पुराने किले की स्थानीय परंपरा दर्ज करता है।
भारत और विदेश में
सामुदायिक लेखन पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बैसवाड़ा, बुंदेलखंड, बिहार, हिमाचल और ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी स्मृतियां भी संजोता है।
07धज या रोड़ कुमार और शासक क्रमपूरी सूची
यूथ रोड़ ऑर्गनाइजेशन का सामुदायिक इतिहास धज या रोड़ कुमार से दादरोड़ तक यह क्रम संजोता है।
धज या रोड़ कुमार, कुनक, रुरक, हरक, देवनिक, अहिनक, परिपत, बल शाह, विजय भान, खंगार, बृहद्रथ, हर अंश, बृहददत्त, इश्मान, श्रीधर, मोहरी, प्रसन्न केत, अमीरवन, महासेन, बृहदधौल, हरिकीर्त, सोम, मित्रवन, पुष्यपात, सुदाव, बिदेरख, नहकमान, मंगलमित्र, सूरत, पुष्कर केत, अंतर केत, सुतजय, बृहदध्वज, बाहुक, कंपजयी, काग्निश, कपिश, सुमंत्र, लिंगलाव, मानसजित, सुंदर केत, दादरोड़
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